देस मेरे मेरी जान है तु…

रगों में दौडता है तेरे रंग का लहू
सांसों में बसी है तेरी मिट्टी कि खुशबू
करू कुछ ऐसा की मैं भी बनु गुरूर तेरा
यहीं रहती है मेरे इस दिल की आरजू